क्या कभी इंडिया ऑस्कर जीत पायेगा, इस फ़िल्म को है सरकारी मदद का इंतज़ार

डिजिटल कैमरा पर बनी फ़िल्म ‘विलेज रॉकस्टार’ ऑस्कर के लिए भारत की ओर से भेजी जा रही है लेकिन फ़िल्म को इंतज़ार है, सरकार की मदद का.

ऑस्कर अवॉर्ड का सपना शायद हर फ़िल्ममेकर देखता है. फ़िल्म ‘विलेज रॉकस्टार’ के लिए नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली निर्देशिका रीमा दास ने फ़िल्म मेकिंग सीखने के लिए किसी भी तरह की कोई ट्रेनिंग या इंस्टीट्यूट में दाख़िला नहीं लिया था.

रीमा दास का कहना है कि , ”मेरे जैसे फ़िल्ममेकर के लिए ऑस्कर में जाकर वहां का ख़र्चा निकालना सबसे बड़ी चुनौती और मुश्किल का काम है. मैंने कई ऐसे लोगों से बात की है जिनकी फ़िल्म पहले ऑस्कर के लिए जा चुकी है और उनसे मुझे पता चला है कि ऑस्कर में जाने के लिए आपके पास अच्छी ख़ासी रक़म होनी चाहिए क्योंकि वहां रहने और खाने के ख़र्चे के अलावा आपको अपनी फ़िल्मों की स्क्रीनिंग ख़ुद करवानी होती है.”

“फ़िल्म का प्रचार भी करना पड़ता है. पूरा ख़र्चा आपको ख़ुद उठाना पड़ता है और मेरे जैसे सामान्य और अकेले फ़िल्ममेकर के लिए ये बहुत ही मुश्किल है क्योंकि मेरे पीछे किसी बड़े प्रोड्यूसर और स्टूडियो का सहयोग नहीं है.”

रीमा दास को उम्मीद है कि शायद असम की राज्य सरकार उनकी मदद करे. वो कहती हैं, ”असम के लिए ये पहला मौक़ा है कि इस राज्य से पहली बार कोई फ़िल्म ऑस्कर के लिए जा रही है. ख़ुशी इस बात की भी है कि सोशल मीडिया पर सब मुझे पैसे की मदद देने को तैयार हैं.”

“लेकिन मुझे इंतज़ार है असम सरकार की मदद का. अगर वहां से मदद हो गई तो मैं फिर किसी से कोई पैसे नहीं लूंगी. लेकिन अगर वक़्त रहते पैसे नहीं मिले या कम मिले तब ज़रूर सोशल मीडिया के ज़रिये मदद लूंगी. फ़िलहाल मुझे इंतज़ार है सरकार की मदद का.”