Hindi

Social Media: जाने Twitter पर क्यों ट्रेंड हो रहा है #MeTooUrbanNaxal

देश के कई हिस्सों में मंगलवार को हुई छापेमारी और गिरफ्तारी के बाद इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई और सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें रिमांड पर भेजने से इनकार कर दिया.

सभी गिरफ़्तार लोग अपने घर में नज़रबंद रहेंगे. अगली सुनवाई छह सितंबर को होगी.

जिन पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें वामपंथी विचारक वरवर राव, वकील सुधा भारद्वाज, मानवाधिकार कार्यकर्ता अरुण फ़रेरा, गौतम नवलखा और वरनॉन गोंज़ाल्विस जैसे नाम शामिल हैं. कुछ लोगों को घर पर नज़रबंद भी किया गया है.

ये सभी लोग अलग-अलग मौकों पर सरकार की आलोचना करते रहे हैं.

इन गिरफ्तारियों को लेकर सोशल मीडिया दो गट में बदल गया है कई इसे सही ठहरा रहे हैं तो कुछ इन गिरफ्तारियों की आलोचना कर रहे हैं कुल मिलाकर सोशल मीडिया पर एक युद्ध देखने को मिल रहा हैं. इनमें गिरफ्तारी को सही ठहराने वाले लोग भी शामिल हैं और गलत बताने वाले भी.

‘बुद्धा इन ट्रैफिक जाम’ फ़िल्म बना चुके विवेक अग्निहोत्री ने मंगलवार को एक ट्वीट किया.

उन्होंने लिखा, ”मुझे कुछ ऐसे युवाओं की ज़रूरत है, जो ऐसी लिस्ट बना सकें जो #UrbanNaxals यानी शहरी नक्सलियों का बचाव कर रहे हैं. अगर आप इस काम में जुड़ना चाहते हैं तो मुझे बताएं.”

इस हैशटैग के जवाब में फ़ेक न्यूज़ का पर्दाफाश करने वाली वेबसाइट एल्ट न्यूज़ से जुड़े प्रतीक सिन्हा ने एक फ़ेसबुक पोस्ट लिखी.

इस पोस्ट में प्रतीक ने लिखा, ”आप जानते हैं कि एंटी-नेशनल टर्म अब अस्तित्व में नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि हममें से ज़्यादातर लोगों ने अपने आप को एंटी-नेशनल बताते हुए इस टर्म को एक चुटकुले में बदल दिया. अब ये आपत्तिजनक नहीं, बस एक मज़ाक है. ऐसे में इन लोगों को एक नए टर्म की ज़रूरत है जो अर्बन नक्सल है. आइए इस टर्म को भी एक चुटकुले में बदलते हैं. #MeTooUrbanNaxal यानी मैं भी अर्बन नक्सल हूं. आप क्या हैं?”

आपको बता दें की जब से ये गिरफ्तारियां हुई है तब से #MeTooUrbanNaxal ट्विटर पर टॉप ट्रेंड में है.

इस हैशटैग के साथ दोनों तरफ के लोग अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.

पत्रकार सागरिका घोष ने विवेक अग्निहोत्री के अर्बन नक्सल टर्म को कहने का एक नया पहलू बताने की कोशिश की. उन्होंने ट्वीट किया है कि क्या ये फिल्मकार अपनी किताब का प्रमोशन कर रहे हैं. दरअसल विवेक अर्बन नक्सल नाम से एक किताब लिख चुके हैं.

माना जाता है कि सरकार के ख़िलाफ़ हथियार उठाने वाले नक्सली ग्रामीण इलाकों और जंगली क्षेत्र में रहते हैं. लेकिन अर्बन नक्सल से यहां मायने शहरों में बसे उन लोगों से है, जो इन नक्सलियों से सहानुभूति रखते हैं.

अक्षय गुप्ता लिखते हैं, ”मुझे यकीन है कि अगर आज भगत सिंह होते तो वो भी इस लिस्ट में शामिल होते.”

 

@Babu_Bhaiyaa हैंडल से लिखा गया, ”बीते कुछ सालों में लोग ‘मैं भी अन्ना हूं’ से ‘मैं भी अर्बन नक्सली हूं’ तक पहुंच गए हैं. 2019 में अगर मोदी जीत गए तो ये लोग ‘मैं भी हाफिज़ सईद’ और 2023 में ‘मैं भी लादेन’ जैसे नारे लगा सकते हैं.”

अशफाक मसूदी ने ट्वीट किया, ”उन सभी लोगों को प्यार और सम्मान जो #MeTooUrbanNaxal के साथ अपनी बात कह रहे हैं. लेकिन ऐसे भी लोग हैं जो अपनी जाति, धर्म या आर्थिक स्थिति की वजह से ये बात भी नहीं कह सकते. वो बस इतना जानते हैं कि अगर कोई हिट लिस्ट बन रही है तो सबसे पहले उन्हें चुना जाएगा.”

यशवंत देशमुख ने ट्वीट किया, ”दोस्तों, मुझे बताया गया कि इमरजेंसी जैसा माहौल है. लोगों को बोलने की इजाज़त नहीं है. आप पीएम की आलोचना नहीं कर सकते. सरकार के ख़िलाफ़ भी कुछ नहीं बोल सकते. और हाल ये है कि #MeTooUrbanNaxal ट्विटर पर टॉप ट्रेंड है.”

 

 

 

 

Related Articles

Back to top button