‘राम के नाम’ डॉक्यूमेंट्री नहीं देख सकेंगे 18 साल से कम उम्र के लोग, Youtube ने लगाई पाबंदी

जाने माने फिल्मकार आनंद पटवर्धन ने कहा है कि बाबरी मस्जिद विध्वंस पर आधारित उनकी राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री ‘‘राम के नाम’’ को देखने के लिये यूट्यूब पर उम्र सीमा लगायी गयी है। निर्देशक ने कहा कि वीडियो साझा करने वाली वेबसाइट उन ‘‘हिंदुत्ववादी गुडों को ध्यान में रख रही है जो सभी धर्मनिरपेक्ष सामग्री को खत्म कर देना चाहते हैं’’। 1992 की यह डॉक्यूमेंट्री अयोध्या में बाबरी मस्जिद वाले स्थान पर राम मंदिर निर्माण के लिये हिंदू राष्ट्रवादी विश्व हिंदू परिषद के अभियान के साथ-साथ इसके कारण भड़की सांप्रदायिक हिंसा की पड़ताल करती है.

डॉक्यूमेंट्री को उस वक्त केंद्रीय फिल्म प्रमाणन ब्यूरो से ‘यू’ सर्टिफिकेट मिला था और 1996 में उच्च न्यायालय से इसके प्रसारण की अनुमति मिलने के बाद उसे दूरदर्शन के प्राइम टाइम पर दिखाया गया था।पटवर्धन ने कहा कि वह हैरान हैं कि इसकी रिलीज के 28 साल बाद अब इसे सिर्फ ‘‘वयस्कों’’ को दिखाये जाने के लायक बताया जा रहा है।

Youtube is at it again, catering to Hindutva goons who want to kill all secular content. Latest is they have put an "age…

Posted by Anand Patwardhan on Sunday, February 10, 2019

 

एक फेसबुक पोस्ट में निर्देशक ने रविवार को लिखा, ‘‘यूट्यूब एक बार फिर हिंदुत्वादी गुडों का ध्यान रख रहा है जो चाहते हैं कि सभी धर्मनिरपेक्ष सामग्री खत्म हो जायें। इसका ताजा उदाहरण यह है कि मेरी जिस फिल्म को सीबीएफसी से ‘यू’ (यूनीवर्सल यानी सभी उम्र वालों के लिये) प्रमाणपत्र मिला है उन्होंने मेरी उसी फिल्म ‘राम के नाम’ को देखने के लिये ‘उम्र सीमा’ लगा रखी है।’’

Posted by Anand Patwardhan on Sunday, January 17, 2016

फिल्मकार ने कहा कि वीडियो साझा करने वाली वेबसाइट ने इससे पहले ‘जय भीम कामरेड’ के साथ भी ऐसा ही किया था जबकि इस फिल्म को भी ‘यू’ प्रमाणपत्र मिला था जो यह सवाल खड़ा करता है कि ‘‘क्या यूट्यूब हमारी सीबीएफसी से भी बुरा है?’’ पटवर्धन ने कहा कि इस वेबसाइट पर ‘‘हिंदुत्व का प्रभाव है’’। वेबसाइट के इस कदम को उन्होंने ‘‘घृणित’’ बताया है।

#Hindutva-embedded-YoutubeDisgusting !!! Now if you are a child over 14 and under 18 you are allowed to do hazardous…

Posted by Anand Patwardhan on Sunday, February 10, 2019

 

उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप 14 साल से अधिक और 18 साल से कम उम्र के बच्चे हैं तो आपको कई मुश्किल भरे काम करने की अनुमति है लेकिन आप ‘राम के नाम’ को नहीं देख सकते हैं। फिलहाल छोटी सी खुशखबरी यह है कि अगर आप 18 साल से अधिक के हैं तो आप यू ट्यूब चैनल पर मेरी इस इस फिल्म को देख सकते हैं जब तक कि वे इस फिल्म पर आगे प्रतिबंध लगाने के नये पैंतरे न सोच लें।’’

पटवर्धन इस बाबत यूट्यूब को पत्र लिखा था जिस पर वीडियो साझा करने वाली वेबसाइट ने जवाब दिया था कि ‘‘फिल्म ‘राम के नाम’ की समीक्षा की गयी जिसके आधार पर उन्होंने तय किया कि यह हर उम्र के दर्शकों के लिये उपयुक्त नहीं हो सकता है और इसलिए इसे देखने के लिय उम्र सीमा लगायी गयी है।’’

वीडियो :